मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

माँ मुझको मफ्लर दिलवादे

माँ मुझको मफ्लर दिलवादे
मैं केजरीवाल बन जाऊं
पहन के मफ्लर खों खों करते
टीवी पर रोज़ मैं आऊँ

देखना माँ मैं घर मे करूँगा
नित दिन नए तमाशे
पापा की सारी बातों के
होंगे रोज़ खुलासे

नही सुनूँगा बात तुम्हारी
नही सुनूँगा चिक-चिक पल भर
देना है बढ़िया खाना दो
वरना पिकनिक जंतर मंतर

बालकनी मे ही लगवा दो
तुम मेरा सिंहासन
वहीं बैठ कर करूँगा दिन भर
धरना और प्रदर्शन

होमवर्क मैं नही करूँगा
चाहे कुछ भी कर लो
भाग जाऊँगा कापी बस्ता
छोड़ छाड़ कर घर को

बस एक छोटी सी विनती है
थप्पड़ नही बजाना
मैं छोटा सा बच्चा हूँ
लेकिन बड़ा सयाना !!