दो समंदर
गोता लगाया तो महसूस किया
सच का समंदर
ऊपर से
खारा तीखा और खट्टा है ।
मगर फिर भी ,
अपना अलग स्वाद है
सच का ।
सच की गहराई में ,
छुपी होती है मिठास ।
सच का समंदर
ऊपर से
खारा तीखा और खट्टा है ।
मगर फिर भी ,
अपना अलग स्वाद है
सच का ।
सच की गहराई में ,
छुपी होती है मिठास ।
वहीं झूठ,
दिखता है ऊपर से मीठा ,
और ज्यों ज्यों
झूठ की गहराई में
झांकते जाएँ
बढ़ता जाता है खारा पन
और झूठ
होता जाता है
तीखा और तीखा और तीखा
गहराई के साथ ।
दिखता है ऊपर से मीठा ,
और ज्यों ज्यों
झूठ की गहराई में
झांकते जाएँ
बढ़ता जाता है खारा पन
और झूठ
होता जाता है
तीखा और तीखा और तीखा
गहराई के साथ ।

