गुरुवार, 12 जनवरी 2017

दो समंदर

दो समंदर

सच के समंदर में -
गोता लगाया तो महसूस किया 
सच का समंदर 
ऊपर से 
खारा तीखा और खट्टा है । 
मगर फिर भी ,
अपना अलग स्वाद है 
सच का । 
सच की गहराई में ,
छुपी होती है मिठास ।



वहीं झूठ,
दिखता है ऊपर से मीठा ,
और ज्यों ज्यों 
झूठ की गहराई में 
झांकते जाएँ 
बढ़ता जाता है खारा पन 
और झूठ 
होता जाता है 
तीखा और तीखा और तीखा 
गहराई के साथ ।

एक दीवाना

एक दीवाना प्यार का ,एक दीवानी प्यार की |
एक वो हैं एक मैं हूँ ,एक कहानी प्यार की || 
मेरा दिल, मेरी धड़कन, मेरा तसव्वुर, मेरे ख्वाब ,
अब तो मेरे गम भी बोलें है ज़ुबानी प्यार की ||


वो न समझा तुम न समझे और न समझा कोई,
दास्तान हैं कितनी मुबहम इस रूहानी प्यार की ||


तुम बस इसको इतना समझो मैं तुम्हारे साथ हूँ
यूँ तो गहराई बहुत है आसमानी प्यार की ||