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चाहा बहुत समेटू पल में ...

बहुत कुछ को बहुत कम मे समेटने की कोशिश रहती है हर किसी की ...ऐसी ही कोशिश हमेशा से मैं भी करता रहा हूँ !

गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

कच्ची तुरपन


प्रस्तुतकर्ता Ajay Chandel पर 4/27/2017 12:50:00 pm कोई टिप्पणी नहीं:
लेबल: दुल्हन, रिश्ते, bride, dulhan, kavita, rasmen, rishte, shaadi, shadi, shrangar, vivah

मंगलवार, 18 अप्रैल 2017

पागल मुझसा है कोई

प्रस्तुतकर्ता Ajay Chandel पर 4/18/2017 08:47:00 pm कोई टिप्पणी नहीं:
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