शनिवार, 12 दिसंबर 2015

विदा


नन्ही सी वो एक परी सी,
फूलों की एक क्यारी सी
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची...
हँसती है बदली जैसी
खुलकर लेकिन पगली जैसी
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची...
अचरज भारी निगाहों से
जब देखा करती है वो
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
कभी कभी यूँ होता है
खामोश सी बैठी रहती है
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
शरारतों का था बचपन...
आज बनी है वो दुल्हन
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
वो कल ही विदा हो जाएगी
घर सूना कर जाएगी...
ये अपनी प्यारी बच्ची ||

आशीष


शरारतों का था जिसका बचपन
आज बनी है वो दुल्हन,
सूना कर जाएगी ये आँगन, 
पहना देगा कोई कंगन ||
वो घर से विदा हो जाएगी
पर न हमसे जुदा हो पाएगी
श्री-सिद्धि-हर्ष मिले,
है आशीष हमारा तू फूले फले ||