शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

अटकलपच्चू दोहे

ऐसा थप्पड़ मारिए होकर के शालीन   !
रोते बने न हँस सके पीसे दाँत महीन !1!


आज अचानक हो गये असुरक्षित महामहीम !
जाते जाते बता गये क्या पाई तालीम     !2!


बहुत दिनो से चूप हैं दिल्ली के महराज़  !
मिश्रा ने जब से खोल दिए आकर के कुछ राज़ !3!


व्यंग्य चुटीला खूब चुभे हंसते बने न रोए !
मारे मोदी ज़ोर लगे आवाज़ तनिक न होये !4!


बहुत घसीटा शाह ने रोए मियाँ पटेल !
एक सीट के चक्कर मे निकल गया सब तेल !5!


मोहरा मोहरा बिछा दिया पक्की कर दी हर  !
हारी बाज़ी जीत ले गये अहमद लंदबरदार   !6!


कबहुँ न साथ मिलाइए शत्रु का मूरख मित्र  !
खेल बिगाड़े आपना दागी करे चरित्र       !7!


मार्गदर्शक देख रहे मारग बैठे बैठे !
पद कोई भी मिला नही न कोई पानी पूछे  !8!


न सबूत न जाँच परख सब कोर्ट कचहरी फेल !
महिला के आरोप पर नेता पुत्र को जैल      !9!


स्त्री से दूरी राखिए चाहे अपनी होये       !
बड़ी फ़ज़ीहत होये जो बीच बजरिय रोए    !10!


हँसना रोना चीखना चुप्पी आँसू चार       !
कुटिल नार के जानिए घातक ये हथियार   !11!


अजय चंदेल 



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