शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

आजकल कितने टिपिकल हो गये हो

आजकल कितने टिपिकल हो गये हो
तुम बुजुर्गों से मुसलसल हो गये हो


ये टोकने की लत कहाँ से सीख ली है
तुम जवानी मे ही अंकल हो गये हो


ये पेट देखो आठवें सा हो गया है
कम से कम तुम डेढ़ कुंटल हो गये हो


बाल मे चाँदी चमकने अब लगी है,
और जबां से तुम हलाहल हो गये हो

चहक चिरैया चहक चिरैया

चहक चिरैया चहक चिरैया
बोल कबूतर गुटर गुटर
रिसोर्स सारे घिसे पिछैयां
क्रेडिट लेवे मेनेजर ।।

बाप मरे न छुट्टी देवे,
बैल सा देखे टुकर टुकर,
फॉरिन का खुद टिरिप बनावे,
महीना भर घूमे खुद कंजर ।
चहक चिरैया चहक चिरैया
बोल कबूतर गुटर गुटर ।।


मूंगफली न फूटे इनसे,
काम दिखावें पचहत्तर ,
मैंने मैंने मैं मैं बोलें
फुदक फुदक के इधर उधर ।
रिसोर्स सारे घिसे पिछैयां
क्रेडिट लेवे मेनेजर ।।


अप्रेजल में दम फूले है,
सांस न अंदर न बाहर,
किशमिश और बादाम दिखावें,
और खाबे देवें लूघर ।
चहक चिरैया चहक चिरैया
बोल कबूतर गुटर गुटर ।


छुट्टी के दिन काम करावें,
रह न जाए कोई कसर ,
ऊपर से पैंतीस मंगावे,
नीचे देवें दस डॉलर ।
रिसोर्स सारे घिसे पिछैयां
क्रेडिट लेवे मेनेजर ।।