आजकल कितने टिपिकल हो गये हो
तुम बुजुर्गों से मुसलसल हो गये हो
ये टोकने की लत कहाँ से सीख ली है
तुम जवानी मे ही अंकल हो गये हो
ये पेट देखो आठवें सा हो गया है
कम से कम तुम डेढ़ कुंटल हो गये हो
बाल मे चाँदी चमकने अब लगी है,
और जबां से तुम हलाहल हो गये हो
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