विवाह पश्चात प्रेमिका से पत्नी बनी
मेरे दो बच्चों की माँ ने मुझसे पूछा
कॉलेज मे तुम कविताएँ लिखते थे
काग़ज़ पे तुम्हारे शब्द कितने सुंदर दिखते थे
अब तुम वैसे लगते क्यों नही..
आजकल कविताएँ लिखते क्यों नही ?
विवाह पश्चात प्रेमी से पति बना मैं
बोला - लिखते तो हम अब भी हैं
लेकिन हमारी भाषा थोड़ी क्लिष्ट हो गयी है
अभिव्यक्ति का माध्यम राशन की लिस्ट हो गयी है
पिछले माह में राशन कैसे ख़त्म हुआ
इस बात का विस्मय करता हूँ
साबुन-क्रीम-पाउडर-कंडीशनर -शेम्पू
शृंगार रस पर इससे ज़्यादा और क्या लिखूं
धूप, कपूर, अगरबत्ती मे भक्ति..
चॉकलेट, बिस्कुट नमकीन मे वात्सल्य की अभिव्यक्ति
दूध- फलों के वीभत्स भाव, खरीद ना पाने का शोक
पर दबा जाता हूँ अपना क्रोध
हास्य मुझे मेरी तनख़्वाह मे दिखता है
सबका बिल भरने का साहस रखता हू ये मेरी वीरता है
सच कहता हूँ कलम वही है मैं भी वही
लेकिन अब राशन की लिस्ट ही मेरी कविता है
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