लोग आसमाँ को रात भर जाग देखते हैं !
कुछ चाँद देखते हैं कुछ दाग देखते हैं !!
खुद जल चुके हैं जो ज़िंदगी में कभी !
दूसरों के घरों में लगा के आग देखते हैं !!
खुद रंगों से बचकर भागते हैं जो !
छिप कर खिड़कियों से गलियों की फाग देखते हैं !!
दूसरों का तमाशा बनाकर होते हैं खुश !
आस्तीनों के अक्सर वो बनकर नाग देखते हैं !!
रोशनी नही होती जिनके घरों में !
जलाने के लिए वो चिराग देखते हैं !!
वो लोग जो महशूर हैं उजाड़ने के लिए !
फूले के लिए दूसरों के बाग देखते हैं !!
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