मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

गीत कहीं कोई गाता है ...

हो निराश मन कुंठित जीवन,
गन्तव्यहीन, करे पथ क्रंदन,
व्यर्थ हो रहे हों आश्वासन,
अनायास एक सुर कानों मे,
अग्रदूत सा बन जाता है,
गीत कहीं कोई गाता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

नित सिंचित कर पोषित करता,
तब जाकर एक पुष्प है खिलता,
माली के मन को ना पूछो,
छनक छनक जाता है ,
जब उपवन मे कुसुमावली पर
भँवरा कोई मंडराता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

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