शनिवार, 13 जनवरी 2018

है यकीं इतने काबिल हम

है यकीं इतने काबिल हम 

हमीं हैं आज,हमीं कल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं |
होंगे सबसे आगे इक दिन,
है यकीं इतने काबिल हैं |
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन |1|
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||

हमीं हैं वो, जवां धड़कन,
जो सीमा पर धड़कते हैं |
गगन मे जो - गरजते हैं,
जो शोलों से - भड़कते हैं |
ज़मीं पर हम,
गगन मे हम,
समंदर मे मचलते हैं | 2 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं वो जवां बाजू,
जो मेहनत खूब करते हैं |
हम अपने रास्ते खुद ही,
बना के आगे बढ़ते हैं |
कृषक हम हैं,
श्रमिक हम हैं,
हमीं बुनियाद रखते हैं | 3 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं वो जवां खून जो,
मैदां मे उतरता है |
रास्ते की, हर एक मुश्किल,
जो हंस कर पार करता है |
डरे न हम,
झुके न हम,
रुके न हम, किन्ही भी इम्तेहानों मे|4|
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं आज के ज्ञानी,
नया इतिहास लिखते हैं |
चीर के सीना अंबर का,
जो मंगल पर पहुँचते हैं |
हम नया जोश रखते हैं,
हम नयी सोच रखते हैं,
हर एक दिन और हम आगे,
एक नयी खोज रखते हैं | 5 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

है यकीं इतने काबिल हम,
है यकीं इतने काबिल हम,
है यकीं इतने काबिल हम ||

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