सोमवार, 22 जून 2009

बुधवार, 17 जून 2009

काम

बस कुछ भी न माँगना हमसे
बस ये कहना की तुम खुश हो
बस ये कहना ये काम है अच्छा
मिलता तुमको दाम है अच्छा
तुमको कोई तकलीफ नही है
बड़े मज़े में तुम रहते हो
इससे ज्यादा कुछ भी न कहना
तुम ऐसा कह भी नही सकते
हमने तुम पर एहसान किया है
तुमको हमने ये काम दिया है

कुछ भी नही बोलते क्यू चुप हो?

कुछ भी नही बोलते क्यू चुप हो?
ये मंच तुम्हारा है तुम बोलो..
जो कुछ भी मन मे चलता हो
बात रखो तुम अपनी, कुछ बोलो
कुछ भी नही बोलते, क्यू चुप हो?

है कोई भी तकलीफ़ तो बोलो
ना हो कोई बात तो बोलो
बस बोलो, है यह मंच तुम्हारा
कुछ सुनना है तुमसे, बस कुछ बोलो
कुछ भी नही बोलते, क्यू चुप हो?

एहसान ये मानो तुमको मंच दिया है
कुछ तो होगी तकलीफ़ तुम्हे भी
कोई बात तो होगी तुम्हे सताती
हर्ज़ ही क्या है खुल कर बोलो
कुछ भी नही बोलते, क्यू चुप हो?

प्रतिभा

प्रतिभा काम नही आती है,
ज्ञान धारा रह जाता है !
इस जीवन की राजनीति मे ,
बस जुगाड़ काम आता है !!
लाखों पाले ज्ञानी सिद्धियाँ,
पर ना मिल पाए प्रसिद्धियाँ !
इस दुनिया मे सफल वही है,
जो धारा मे बह जाता है !!
अध-जल गगरी छलकत जाए,
पर अध-जल गगरी सबको भाए !
अध-जल गगरी लेके आदमी,
तेज़ी से आगे जाता है !!
जिससे मन की प्रीत जुड़ी हो ,
उससे कितनी भी ग़लती हो !
खाट खड़ी कर दे सबकी वो ,
पर माफ़ किया जाता है !!
काम करेजा और लगा रह ,
और सभी के नीचे दबा रह !
मामूली सी भी ग़लती करना ,
बस तू रगड़ा जाता है !!
तेरे अन्तर में कितनी प्रतिभा ,
कूट कूट कर भरी हुई है !
तेरे अंतर्मन की पुकार को ,
कौन भला सुन पाता है !!




तुषार...

पकी फसल थी
स्वप्न महल था
एक अड़ंगा अड़ गया
फसल पर तुषार पड़ गया
जीवन-गणित फिर बिगड़ गया
आम पका और सड़ गया
तुषार पड़ गया
सदमे से अकड़ गया
वो जिंदगी रगड़ गया
तुषार पड़ गया
यूँ पलट के वो पड़ा
'सूजन' आई बिगड़ गया
तुषार पड़ गया
खाई कसम राम की
और राम को झूठा कहा
इस तरह से सबकी वो
नज़र-वज़र से झड़ गया
उसकी अक्ल पर तो फिर
तुषार पड़ गया