बुधवार, 17 जून 2009

प्रतिभा

प्रतिभा काम नही आती है,
ज्ञान धारा रह जाता है !
इस जीवन की राजनीति मे ,
बस जुगाड़ काम आता है !!
लाखों पाले ज्ञानी सिद्धियाँ,
पर ना मिल पाए प्रसिद्धियाँ !
इस दुनिया मे सफल वही है,
जो धारा मे बह जाता है !!
अध-जल गगरी छलकत जाए,
पर अध-जल गगरी सबको भाए !
अध-जल गगरी लेके आदमी,
तेज़ी से आगे जाता है !!
जिससे मन की प्रीत जुड़ी हो ,
उससे कितनी भी ग़लती हो !
खाट खड़ी कर दे सबकी वो ,
पर माफ़ किया जाता है !!
काम करेजा और लगा रह ,
और सभी के नीचे दबा रह !
मामूली सी भी ग़लती करना ,
बस तू रगड़ा जाता है !!
तेरे अन्तर में कितनी प्रतिभा ,
कूट कूट कर भरी हुई है !
तेरे अंतर्मन की पुकार को ,
कौन भला सुन पाता है !!




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