मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

गीत कहीं कोई गाता है ...

हो निराश मन कुंठित जीवन,
गन्तव्यहीन, करे पथ क्रंदन,
व्यर्थ हो रहे हों आश्वासन,
अनायास एक सुर कानों मे,
अग्रदूत सा बन जाता है,
गीत कहीं कोई गाता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

नित सिंचित कर पोषित करता,
तब जाकर एक पुष्प है खिलता,
माली के मन को ना पूछो,
छनक छनक जाता है ,
जब उपवन मे कुसुमावली पर
भँवरा कोई मंडराता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

घर और माँ

जाने क्यूँ जबसुबह उठा तो,
मेरे दिल को बात -
आज ये बहुत कचोटी |
बहुत दिनों सेमिली नही है,
तेरे हाथ कीदाल,
दाल मे सोंधी रोटी | 1 |
                                मेरे दिल को ..
चन्द हरे पत्तों की खातिर,
दूर रहा करता हूँ,
अपने ही घर जाने से -
मजबूर रहा करता हूँ,
याद बहुत आती हैं घर की,
बातें छोटी छोटी | 2 |
                                मेरे दिल को ...
अपने ही घर में मुझको तुम,
मेहमान बना देती हो,
जब भी घर आता हूँ,
पकवान बना देती हो,
सात तरह की सब्जी-पूड़ी,
मीठा बारह कोटि | 3 |
                                मेरे दिल को ...
अब भी अच्छा लगता है,
मुझको कथरी पर सोना,
भाता नहींमुझे नया ये,
मोटा-नर्म बिछौना,
और बिछाना उसपरघर की,
चादर सबसे मोटी | 4 |
                                मेरे दिल को ...
आपा-धापी दौड़ भाग से,
थक कर सो जाता हूँ,
तुमसे बात नही हो पाती,
भूल भी मैं जाता हूँ,
घर की याद दिलाने वाली,
आती हैं तब बर्रोटी  | 5 |
                                मेरे दिल को ...
अपना भी घर बना लिया है,
कहने को इन मीनारों में,
रंग करा रखा है सबसे -
महँगा चार दीवारों में,
लेकिन चैन वही देती है,

अपनी छोटी सी ओटी | 6 |


*कथरी : पुराने कपड़ों से बनाया गया बिस्तर

*बर्रोटी : दुःस्वप्न
*ओटीआँगन / पोर्च
*कोटि : तरह
 


रविवार, 1 फ़रवरी 2015

व्याकुल

हैं मेरे नैना, दरस पी--से  |
कोई कहे जाके, ये तपस पिया से ||
** पी--से (= प्यासे)

नैनो में बस एक ही है सूरत,
लगते हैं सारे दिरस पिया से ||

** दिरस ( = दृश्य )

ये तो नहीं कि बस मैं हूँ व्याकुल,
वो भी हैं गाते सरस पी-हा-से ||
** पी-हा-से ( = पपीहा की पीहा )

चुप ही रहूंगी, मैं सारा जीवन,
कुछ भी कहूँगी, तो बस पिया से ||

अजय चंदेल (01-02-2015)