वसंत
सर्द भोर की लालिमा,
चटख धूप खुशरंग
चित्रकार रश्मिरथी,
नभ साँझ रंगे बहुरंग ।
श्याम विहग का कूकना,
गौरैयों का गान ।
मूक फुदकती गिलहरियां
भ्रमरों का मधुपान ।
खेत में पकती बालियां,
सरसों के पीले फूल ।
बौर आम के पेड़ पर,
ऋतु सृजन अनुकूल |
सरस सरस्वती वंदना,
ज्ञान कला वरदान ।
भोग केसरी भात का,
मधुर मधुर पकवान |
पीले वस्त्र और पुष्प से,
किए साज सिंगार |
सांस्कृतिक अनुराग है,
केसरिया नर-नार |
सर्द भोर की लालिमा,
चटख धूप खुशरंग
चित्रकार रश्मिरथी,
नभ साँझ रंगे बहुरंग ।
श्याम विहग का कूकना,
गौरैयों का गान ।
मूक फुदकती गिलहरियां
भ्रमरों का मधुपान ।
खेत में पकती बालियां,
सरसों के पीले फूल ।
बौर आम के पेड़ पर,
ऋतु सृजन अनुकूल |
सरस सरस्वती वंदना,
ज्ञान कला वरदान ।
भोग केसरी भात का,
मधुर मधुर पकवान |
पीले वस्त्र और पुष्प से,
किए साज सिंगार |
सांस्कृतिक अनुराग है,
केसरिया नर-नार |