सोमवार, 22 जनवरी 2018

वसंत

वसंत 

सर्द भोर की लालिमा,
चटख धूप खुशरंग
चित्रकार रश्मिरथी, 
नभ साँझ रंगे बहुरंग ।

श्याम विहग का कूकना,
गौरैयों का गान ।
मूक फुदकती गिलहरियां 
भ्रमरों का मधुपान ।

खेत में पकती बालियां,
सरसों के पीले फूल ।
बौर आम के पेड़ पर,
ऋतु सृजन अनुकूल |

सरस सरस्वती वंदना,
ज्ञान कला वरदान ।
भोग केसरी भात का,
मधुर मधुर पकवान |

पीले वस्त्र और पुष्प से,
किए साज सिंगार |
सांस्कृतिक अनुराग है, 
केसरिया नर-नार | 

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

परपंच


खेल देखो लुटियनी अय्यारियों का,
मूर्ख सारे पॅंच बनकर रह गये ||

अपनी इज़्ज़त अपने हाथों यूँ उछाली,
न्यायालय भी मंच बनकर रह गये ||

जब हवेली से हुई ताकीद सेवा चाहिए,
भ्रत्य सब सरपंच बनकर रह गये ||

जो फँसे तो फिर कभी सुलझे नही
क़ानून सब परपंच बनकर रह गये ||

हंस बनकर पीढ़ियों से पुज रहे थे,
आज क्यूँ वो क्रौन्च बनकर रह गये ?

शनिवार, 13 जनवरी 2018

है यकीं इतने काबिल हम

है यकीं इतने काबिल हम 

हमीं हैं आज,हमीं कल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं |
होंगे सबसे आगे इक दिन,
है यकीं इतने काबिल हैं |
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन |1|
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||

हमीं हैं वो, जवां धड़कन,
जो सीमा पर धड़कते हैं |
गगन मे जो - गरजते हैं,
जो शोलों से - भड़कते हैं |
ज़मीं पर हम,
गगन मे हम,
समंदर मे मचलते हैं | 2 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं वो जवां बाजू,
जो मेहनत खूब करते हैं |
हम अपने रास्ते खुद ही,
बना के आगे बढ़ते हैं |
कृषक हम हैं,
श्रमिक हम हैं,
हमीं बुनियाद रखते हैं | 3 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं वो जवां खून जो,
मैदां मे उतरता है |
रास्ते की, हर एक मुश्किल,
जो हंस कर पार करता है |
डरे न हम,
झुके न हम,
रुके न हम, किन्ही भी इम्तेहानों मे|4|
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

हमीं हैं आज के ज्ञानी,
नया इतिहास लिखते हैं |
चीर के सीना अंबर का,
जो मंगल पर पहुँचते हैं |
हम नया जोश रखते हैं,
हम नयी सोच रखते हैं,
हर एक दिन और हम आगे,
एक नयी खोज रखते हैं | 5 |
है यकीं इतने काबिल हैं,
हमीं इस देश का बल हैं ||
उठाना है,
चलाना हैं,
बढ़ाना है-
हमे इस देश को इक दिन ||

है यकीं इतने काबिल हम,
है यकीं इतने काबिल हम,
है यकीं इतने काबिल हम ||