सोमवार, 22 जनवरी 2018

वसंत

वसंत 

सर्द भोर की लालिमा,
चटख धूप खुशरंग
चित्रकार रश्मिरथी, 
नभ साँझ रंगे बहुरंग ।

श्याम विहग का कूकना,
गौरैयों का गान ।
मूक फुदकती गिलहरियां 
भ्रमरों का मधुपान ।

खेत में पकती बालियां,
सरसों के पीले फूल ।
बौर आम के पेड़ पर,
ऋतु सृजन अनुकूल |

सरस सरस्वती वंदना,
ज्ञान कला वरदान ।
भोग केसरी भात का,
मधुर मधुर पकवान |

पीले वस्त्र और पुष्प से,
किए साज सिंगार |
सांस्कृतिक अनुराग है, 
केसरिया नर-नार | 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें