खेल देखो लुटियनी अय्यारियों का,
मूर्ख सारे पॅंच बनकर रह गये ||
अपनी इज़्ज़त अपने हाथों यूँ उछाली,
न्यायालय भी मंच बनकर रह गये ||
जब हवेली से हुई ताकीद सेवा चाहिए,
भ्रत्य सब सरपंच बनकर रह गये ||
जो फँसे तो फिर कभी सुलझे नही
क़ानून सब परपंच बनकर रह गये ||
हंस बनकर पीढ़ियों से पुज रहे थे,
आज क्यूँ वो क्रौन्च बनकर रह गये ?
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