सोमवार, 26 मार्च 2018

मच्छर

सुबह सुबह जैसे ही,
मच्छरदानी उठाई,
मच्छरों को,
हमारे खून की खुश्बू आई ।
रात भर से भूखे प्यासे मच्छरों की,
बांछें खिलीं,
जान में जान आई ।
चारों तरफ हमारे भिनभिनाकर ,
आपस में खुसफुसाने लगे मच्छर ।
आ जाओ सब खाना लग गया है,
यह आदमी सोया था आखिर जग गया है ।
जैसे सारे मच्छर एक साथ ,
जेल से छूट पड़े,
हमारी देह पर,
भूखे कुत्तों से टूट पड़े ।
एक मच्छर अपने बीवी बच्चों से बोला,
ओ एनोफेलिस की माई,
बच्चों को बुला लो,
चलो सब खा लो ।
अम्मा को रहने देना,
इस खून में मसाला बहुत है,
पचेगा नहीं ।
तुम लोग जल्दी से पी लो,
बचेगा नहीं ।
बगल के नाले से आई,
डेंगू वाली मच्छराइन मुस्काई,
जैसे उसे सेल का कूपन मिला हो,
हमें काटने का इनविटेशन मिला हो ।
हमारी गर्दन पर बैठी,
और अपने प्राण खो बैठी ।
छत पर पड़े टीन में रहने वाली,
एक कूल टीनएजर मच्छरी,
हमारे कान के पास आई,
मादकता से भिनभिनाइ
हमारा खून टेस्ट करके बोली
आपका खून कितना स्वीट है ।
डीजे की तरह बजता है हार्ट,
बड़ी फ़ास्ट बीट है ।।
एक मच्छर,शायद आलसी था ,
या कॉर्पोरेट वाला था,
उसके पास फुरसत नहीं थी,
या फिर किसी को काटने की आदत नहीं थी।
थोडा सकुचाया और बोला,
एक्सक्यूज़ मी,
आप होम डीलीवरी करते है क्या?
सुबह या शाम गार्डन में विचरते हैं क्या?
एक मच्छर का डंक,
हमारे बाजू में गड गया ।
और जैसे ही हमने
उसे मारने के लिए हाथ उठाया,
उसने भिनभिनाते हुए हाथ जोड़े,
और डंक रगड़ते हुए,
माफ़ी पे अड़ गया ।
एक डेंगू छाप मच्छर,
ज्यादा ही भाव खा रहा था,
बार बार बायें कान के पास
आजादी आजादी भिनभिना रहा था ।
अपना लाल डंक दिखा के बोला
ये बायीं टांग हमारी है ।
देह से इसको तोड़कर दो,
खून पीने के लिए आजाद कर दो ।
कुछ मच्छरों का झुण्ड
हम पर यूँ झपटा,
जैसे बस उठा के ही ले जायेगा ।
उनमे से एक बोला
काहो भैया? खून में का मिलात हो?
खून में ये क्या दवाई है?
तुम कौन जात हो ?
एक मच्छर उड़ता उड़ता हंस रहा था,
चुपचाप लेकिन पीठ पर ही डस रहा था,
फिर हमें चैलेंज देके ऐसे बोला,
मैं काटता हूँ तुम्हे सुन लो गुरु
ठोको मुझे ठोको मुझे ,ठोको गुरु
मारने को जैसे ही हम हुए तो उड़ गया था,
थप्पड़ खुदी के हाथ से यूँ पड गया था  ||

न्यायव्यवस्था

कानून की धाराओं को हम, धता बता कर आये हैं। न्यायव्यवस्था को अपनी, मध्यमा दिखा कर आये हैं।
जेल से निकले हैं लेकिन, शर्म नाम की चीज़ नहीं, हम शर्म को CBI के, मुंह पर चिपकाकर आये हैं ।
धनबल आखिर क्या होता है, अब खुलकर दिखलायेंगे। जो कार्यवाही में शामिल थे, अब उनको मज़ा चखाएंगे।

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शुक्रवार, 23 मार्च 2018

फिर बोई अंधियारो चाने ...

मट्टी तेल की डब्बी के ,
उजियारे में रोटी खाने ।
फिर बोई अंधियारो चाने ,
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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जब जब बस में बैठत ते,
छै छै घण्टा पौंचत नै ते,
अब दो घंटो में लगत ठिकाने
सड़कें फिर बेइ खटारा चाने ।
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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जबरन जे खाते खुलवा दये,
पैसा सीधे ओइ में आने ।
पूरे मिलें तो कौन मजा है,
आधे मिलें, मनो हाथ में चाने ।
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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वोट देके रजधानी भेजो
बेर बेर काय लौट के आने  |
पहले वाले सब बडिया ते,
पांच साल में सकल दिखाने ।
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।















घर घर शौचालय बनवा दये,
बाहर जाबे को तरसा दये
ऐसी तैसी करे जो मोदी,
हमें तो खेतों में फिर जाने ।
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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मोदी को अब संग नई देंने,
गैस सिलेंडर हमें नई लेने
अपने गोबर कंडा वारी,
गाँकर भरता फिरकऊं खाने
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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बिना परिक्षा दये जुगत से,
चपरासी भी बन नई पाने ।
नौकरियों में मचे धांधली,
फिर से बई व्यवस्था चाने ।
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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सबरी दुनिया में ग़दर मची है,
मध्य प्रदेश में सब शांती है
अमन चैन के गए ज़माने
हमें तो दंगा गुंडई चाने
दिग्गी वारी कांग्रेस खों लाने ।

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