बिके हुए अखबार सब टीवी लुटियन फेल ।
सोशल मीडिया प्रकट करे झूठ प्रपंची खेल ।।
सोशल मीडिया बन बैठी सत्ता सत्त लगाम ।
सत्ताधर कर सकें नहीं कोई छुपा कर काम ।।
सारे सत्ता पक्ष का जमकर करो विरोध ।
किन्तु राष्ट्र निर्माण में बनो नहीं अवरोध ।।
अपने गढ़ में दिखे घुमाते राजा चकला बेलन ।
शक्ति वोट की नचा रही उंगली पर सिंहासन ।।
पापड़ बेलत जग मुआ मुखमंती भया न कोय ।
जो समझे पर पीर को वही सुमंती होये ।|

एक मनुष को रोकना ही राजनीति का मूल ।
सबकी आँखों में झोंकते जात धरम की धूल ।।
एक तरफ हैं लगे जताने पिद्दीगण लोयल्टी ।
जीभ निकालें पूछ हिलाएं, मारें अल्टी पल्टी ।
जब चुनाव में दीख पड़ी अपनी हालात पतली,
नानी से तब मोह हुआ, जा पहुंचे फिर इटली ।।
वोट मांगते राजकुंवर सपने बहुत संजोये ।।
पग पग घूमे, अंधड़ लू में, समझे मूरख मोये ।।
फूलपुर से फूल गया मठाधीश का मठ |
रणनीति में दोष था या योगी का हठ |
बुआ भतीजा चुभा गये योगी हृदय मे शूल |
साइकल खुद को समझ रही हाथी सा स्थूल |
प्रतिकूल परिणाम देख ऐसे हुए प्रसन्न |
भूले स्वयं की दुर्दशा वोट पाए न मन ||
सौ सोचे और भरे एक डग, शहजादे और माई ।
शाह का मोहरा कहाँ को कूदे आगे पीछे ढाई ।।
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