पग पग देता जीवन शिक्षा !
समेटकर एक पल में जीवन
करना चाहा बहुत समीक्षा !!
इस जीवन को जी लेने की
चाह मचल कर रह जाती है !!!
दर्द बहुत होता है लेकिन
आह निकल कर रह जाती है !!!!
मन मे है बिखराव अजब सा
अंदर है टकराव बहुत अजब सा !
मगर नही दिखता चेहरे पर
ऐसा कोई भाव अजब सा !!
आखें नही छुपाती कुछ भी
भाव बदल कर कह जाती है !!!
दर्द बहुत होता है लेकिन
आह निकल कर रह जाती है !!!!
अपने सिक्के मे खोट पायी है
बैरी अपना स्वयं भाई है !
घाव नहीं दिखता है लेकिन
अंदर चोट कही खाई है !!
पानी की जो बूँद सहेजू
राह बदल कर बह जाती है !!!
दर्द बहुत होता है लेकिन
आह निकल कर रह जाती है !!!!
umda. blog jagat men swagat.
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना. अपने अहसासों का सुन्दर प्रस्तुतीकरण. बहुत अच्छा.. आगे लिखते रहें
जवाब देंहटाएं- सुलभ ( (यादों का इन्द्रजाल..)
बहुत हीं सुन्दर भाव है कविता के ।
जवाब देंहटाएंचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.
गुलमोहर का फूल
nice post.narayan narayan
जवाब देंहटाएंबहुत हीं सुन्दर भाव है कविता के ।
जवाब देंहटाएंचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी
शुभकामनायें.
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