ज़रा इनकी मुस्कराहट देखिये,
आने वाले कल की आहट देखिये
देखिये शर्म को जूतों तले कुचला हुआ
चल रही क्या सुगबुगाहट देखिये
देखिये किस चीज़ की है प्यास इनको,
खून से आती तरावट देखिये
देखिये इनके खुले प्रतिवाद को,
व्यूह की इनके बनावट देखिये
बहुत कुछ को बहुत कम मे समेटने की कोशिश रहती है हर किसी की ...ऐसी ही कोशिश हमेशा से मैं भी करता रहा हूँ !
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