सब भुजंग प्रण किये मन में ही ।
राम भुवन अब बनन न देहि ।
नाना जतन करहिं सब द्रोही ।
राम नाम हन सकहिं न कोई ।
सत्ता सतत सकल सनेहा ।
सब स्वारथ संतति संदेहा ।
आवें धर छल रूप निसाचर ।
सब छल नष्ट करे प्रभु वानर ।
आप आप में आपदा, आपत्ति न कोय।
किसी राज में आप सी, अन्य विपत्ति न होय।
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।। बजरंग बली की जय ।। भक्ति शक्ति और ज्ञान की मुरति सौम्य सुजान । स्मरण मात्र से कष्ट हरें महावीर हनुमान ।। लाल देह कपि रूप के दर्शन से कल्याण । हर संकट से तार दे, बजरंगी का ध्यान ।।
आप आप में आपदा, आपत्ति न कोय।
किसी राज में आप सी, अन्य विपत्ति न होय।
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।। बजरंग बली की जय ।। भक्ति शक्ति और ज्ञान की मुरति सौम्य सुजान । स्मरण मात्र से कष्ट हरें महावीर हनुमान ।। लाल देह कपि रूप के दर्शन से कल्याण । हर संकट से तार दे, बजरंगी का ध्यान ।।

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