शनिवार, 12 दिसंबर 2015

विदा


नन्ही सी वो एक परी सी,
फूलों की एक क्यारी सी
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची...
हँसती है बदली जैसी
खुलकर लेकिन पगली जैसी
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची...
अचरज भारी निगाहों से
जब देखा करती है वो
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
कभी कभी यूँ होता है
खामोश सी बैठी रहती है
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
शरारतों का था बचपन...
आज बनी है वो दुल्हन
बड़ी प्यारी लगती है बच्ची..
वो कल ही विदा हो जाएगी
घर सूना कर जाएगी...
ये अपनी प्यारी बच्ची ||

आशीष


शरारतों का था जिसका बचपन
आज बनी है वो दुल्हन,
सूना कर जाएगी ये आँगन, 
पहना देगा कोई कंगन ||
वो घर से विदा हो जाएगी
पर न हमसे जुदा हो पाएगी
श्री-सिद्धि-हर्ष मिले,
है आशीष हमारा तू फूले फले ||

शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

आइ. टी. इंजिनियर की तरफ से ..


1.
ऐसा नही ऑफशोर हमें अब सहन नही होता,

ऐसे काम करने का लेकिन अब मन नही होता |

टिके हैं जब तक टिके हैं यहाँ टिकने के लिए,

लेकिन इतनी सॅलरी से खर्चा वहन नही होता ||





2.
इनक्रिमेंट की उम्मीद है, लॉलीपोप--ऑनसाइट की तमन्ना,

मुझे मेरे काम का क्रेडिट भी देते तुमसे नही बनना |

चला लो बंदूकें रखकर हमारे कंधों पर दो चार दिन और,

हमारे जाने के बाद ये प्रॉजेक्ट तुमसे नही संभलना !!




 

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

जिंदगी को देखने के मायने बदल गये ...

इस हफ्ते एक और अनुभव ...



जिंदगी को देखने के मायने बदल गये |
सूरतें नही बदलीं आईने बदल गये ||

औरों के बदलने की बात कीजिए ही क्या,
अपने यार तो अपने ही सामने बदल गये ||

एक मौसम में रहे वो इसी शाख पर,
मौसम के साथ उनके आशने बदल गये || 

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

जा चुके हो तो…


Twitter पर @mithelesh से एक मिसरा उधार लिया था उसके बाद ये हुआ ...

 

जा चुके हो तो कभी याद मुझे आओ |

आके खुद को भी मेरे पास से ले जाओ ||

 

सारा घर घेर रखा है तुम्हारी यादों ने,

कैसे घर खाली ये कराऊँ मैं बताओ ||

 

जो ख्वाब साथ कभी हमने तुमने देखे थे,

अपने हिस्से के सभी ख्वाब वो ले जाओ ||

 

मैं जागकर भी कहाँ जाग रहा था अब तक,

अभी मैं नींद में हूँ, सोने दो, जगाओ ||

 

तुम्हारा जाना भी क्या जाना है जाने-जाना,

जेहन से नाम सहित अगर निकल जाओ ||

शनिवार, 7 मार्च 2015

रिश्ते ...

रिश्ते तल्ख़ इतने हो न जाएँ ,
जिगर को फ़ूकें, ज़ुबान जलाएँ |
ये धार शब्दों की काटती है,
भाई से भाई, बेटों से माएँ | 1 |

है बात कुछ जो, चुभी है गहरी,
मगर पीर दिल की, किसे सुनाएँ |
यहाँ सारे चेहरे, हैं अजनबी से,
कुछ किससे पूछें, किसे बताएँ |2 |

लगी थी ठोकर , संभल गया पर,
थी मेरे पीछे, बड़ी दुआएँ |
दूर होकर भी, करीब रहना,
अजनबी लगें न, नज़र जब मिलाएँ |3|

बहुत से क़िस्से हैं खट्टे मीठे ,
कभी हंसाएँ, कभी रुलाएँ |
बड़ा ही मुश्किल ये फ़ैसला है
किसे याद रखें , किसे भुलाएँ |4|

अलग सा चैन-ओ-अमन यहाँ है,
इस शहर की हैं अलग अदाएँ |
मिट्टी है घर की, अलग महक है,
अलग है रंगत , अलग हवाएँ  |5|


शुक्रवार, 6 मार्च 2015

लोग आसमाँ को ..

लोग आसमाँ को रात भर जाग देखते हैं !
कुछ चाँद देखते हैं कुछ दाग देखते हैं !!
खुद जल चुके  हैं जो ज़िंदगी  में कभी  !
दूसरों  के घरों में लगा के आग देखते हैं !!
खुद रंगों से बचकर  भागते हैं जो !
छिप कर खिड़कियों से गलियों की फाग देखते हैं !!
दूसरों  का तमाशा बनाकर होते हैं खुश !
आस्तीनों के अक्सर वो बनकर नाग देखते हैं !!
रोशनी नही होती जिनके घरों में !
जलाने के लिए वो चिराग देखते हैं !!
वो लोग जो महशूर हैं उजाड़ने के लिए !
 फूले के लिए दूसरों के बाग देखते हैं  !!

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

गीत कहीं कोई गाता है ...

हो निराश मन कुंठित जीवन,
गन्तव्यहीन, करे पथ क्रंदन,
व्यर्थ हो रहे हों आश्वासन,
अनायास एक सुर कानों मे,
अग्रदूत सा बन जाता है,
गीत कहीं कोई गाता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

नित सिंचित कर पोषित करता,
तब जाकर एक पुष्प है खिलता,
माली के मन को ना पूछो,
छनक छनक जाता है ,
जब उपवन मे कुसुमावली पर
भँवरा कोई मंडराता है ||
    गीत कहीं कोई गाता है ...

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

घर और माँ

जाने क्यूँ जबसुबह उठा तो,
मेरे दिल को बात -
आज ये बहुत कचोटी |
बहुत दिनों सेमिली नही है,
तेरे हाथ कीदाल,
दाल मे सोंधी रोटी | 1 |
                                मेरे दिल को ..
चन्द हरे पत्तों की खातिर,
दूर रहा करता हूँ,
अपने ही घर जाने से -
मजबूर रहा करता हूँ,
याद बहुत आती हैं घर की,
बातें छोटी छोटी | 2 |
                                मेरे दिल को ...
अपने ही घर में मुझको तुम,
मेहमान बना देती हो,
जब भी घर आता हूँ,
पकवान बना देती हो,
सात तरह की सब्जी-पूड़ी,
मीठा बारह कोटि | 3 |
                                मेरे दिल को ...
अब भी अच्छा लगता है,
मुझको कथरी पर सोना,
भाता नहींमुझे नया ये,
मोटा-नर्म बिछौना,
और बिछाना उसपरघर की,
चादर सबसे मोटी | 4 |
                                मेरे दिल को ...
आपा-धापी दौड़ भाग से,
थक कर सो जाता हूँ,
तुमसे बात नही हो पाती,
भूल भी मैं जाता हूँ,
घर की याद दिलाने वाली,
आती हैं तब बर्रोटी  | 5 |
                                मेरे दिल को ...
अपना भी घर बना लिया है,
कहने को इन मीनारों में,
रंग करा रखा है सबसे -
महँगा चार दीवारों में,
लेकिन चैन वही देती है,

अपनी छोटी सी ओटी | 6 |


*कथरी : पुराने कपड़ों से बनाया गया बिस्तर

*बर्रोटी : दुःस्वप्न
*ओटीआँगन / पोर्च
*कोटि : तरह
 


रविवार, 1 फ़रवरी 2015

व्याकुल

हैं मेरे नैना, दरस पी--से  |
कोई कहे जाके, ये तपस पिया से ||
** पी--से (= प्यासे)

नैनो में बस एक ही है सूरत,
लगते हैं सारे दिरस पिया से ||

** दिरस ( = दृश्य )

ये तो नहीं कि बस मैं हूँ व्याकुल,
वो भी हैं गाते सरस पी-हा-से ||
** पी-हा-से ( = पपीहा की पीहा )

चुप ही रहूंगी, मैं सारा जीवन,
कुछ भी कहूँगी, तो बस पिया से ||

अजय चंदेल (01-02-2015)