किस किस को रोकिये क्या क्या संभालिये ।
अपनों की गलतियों को किस पे डालिये ।।
वो आके चोरी कर लें या डाका दाल दें ,
आप अपनी आँख पे एक पर्दा डालिये ।।
लिबरल सी जिंदगी में फेमनिस्ट शोखियां,
अपनी लड़किओं को इनसे संभालिये ।।
उम्मीद थी नयी बहर का होता कोई असर,
वो कह रहे हैं छूटा मुद्दा अब न उछालिये ।
घुस के बैठे हैं खतरे कितने, अपने पड़ोस में,
चूहों को कैसे उनके बिल से निकालिये ।
कुछ ज्यादा ही खुला है , माहौल शहर का,
खुशनसीब है जिसने बच्चे अपने बचा लिए ।।
अपनों की गलतियों को किस पे डालिये ।।
वो आके चोरी कर लें या डाका दाल दें ,
आप अपनी आँख पे एक पर्दा डालिये ।।
लिबरल सी जिंदगी में फेमनिस्ट शोखियां,
अपनी लड़किओं को इनसे संभालिये ।।
उम्मीद थी नयी बहर का होता कोई असर,
वो कह रहे हैं छूटा मुद्दा अब न उछालिये ।
घुस के बैठे हैं खतरे कितने, अपने पड़ोस में,
चूहों को कैसे उनके बिल से निकालिये ।
कुछ ज्यादा ही खुला है , माहौल शहर का,
खुशनसीब है जिसने बच्चे अपने बचा लिए ।।
बहुत खूब
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